Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
भक्ति

समस्त जीवों का उपकारी होने से तथा समीचीन धर्म की खान की वृद्धि का कारण होने से गृहस्थों के लिए जिनालय की प्रतिष्ठा के समान कोई पुण्य नहीं है।

Because it benefits all beings and because it causes the growth of the mine of true dharma, for householders there is no merit equal to consecrating a Jain temple.

— आराध्य सूत्र · #5508

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हे जिनेन्द्र भगवान्! हे देवों के देव! बाल्यावस्था से आज तक आपके श्रीचरणों की सेवा में आसक्त शिष्यों को कल्पलता सम सेवा से जो काल व्यतीत हुआ है, आज उस सेवा का वह फल आपसे चाहता हूँ कि प्राणों के निकलते समय आपके नाम से सहित अक्षरों के पढ़ने में मेरा गला कुण्ठित न हो।
भक्ति