Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
भक्ति

सपेरे के शब्द सुन कालिया नाग निर्विष हो नाचने लगता है तब गुरु/प्रभु के शब्द सुन मिथ्यात्व क्यों दूर नहीं हो सकता है।

Hearing the snake-charmer's words the black serpent grows venomless and begins to dance; then, hearing the words of the guru or Lord, why can false belief not be dispelled?

— आराध्य सूत्र · #5419

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हे जिनेन्द्र भगवान्! हे देवों के देव! बाल्यावस्था से आज तक आपके श्रीचरणों की सेवा में आसक्त शिष्यों को कल्पलता सम सेवा से जो काल व्यतीत हुआ है, आज उस सेवा का वह फल आपसे चाहता हूँ कि प्राणों के निकलते समय आपके नाम से सहित अक्षरों के पढ़ने में मेरा गला कुण्ठित न हो।
भक्ति