Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
भक्ति

जिन्दगी की आवश्यक वस्तु की कामना से यदि भक्ति की जाती है तो वह न तो नियम है, न मिथ्यात्व है, न सकाम भाव है, वह एक मजबूरी है यदि कोई घर में बीमार हो गया णमोकार नहीं पढ़े तो क्या करें? भक्तामर नहीं पढ़े तो क्या करें? भगवान् से भोग विलास की याचना करना निदान है।

If devotion is done out of desire for a necessity of life, it is neither a vow, nor false belief, nor mere desire-driven feeling, but a compulsion; if someone at home falls ill, what else can one do but recite the Namokar or the Bhaktamar? But to beg the Lord for enjoyment and luxury is nidan (a binding resolve).

— आराध्य सूत्र · #4978

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हे जिनेन्द्र भगवान्! हे देवों के देव! बाल्यावस्था से आज तक आपके श्रीचरणों की सेवा में आसक्त शिष्यों को कल्पलता सम सेवा से जो काल व्यतीत हुआ है, आज उस सेवा का वह फल आपसे चाहता हूँ कि प्राणों के निकलते समय आपके नाम से सहित अक्षरों के पढ़ने में मेरा गला कुण्ठित न हो।
भक्ति