Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
भक्ति

अनेक तपस्या तथा साधना के फल से ही मनुष्य सरल तथा उदार बनता है। सरल हुए बिना ईश्वर की प्राप्ति नहीं होती है सरल और विश्वासी के समीप ही प्रभु अपना स्वरूप प्रकट किया करते हैं।

Only through the fruit of much austerity and practice does a man become simple and generous. Without becoming simple, God is not attained; the Lord reveals His nature only to the simple and the trusting.

— आराध्य सूत्र · #4758

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हे जिनेन्द्र भगवान्! हे देवों के देव! बाल्यावस्था से आज तक आपके श्रीचरणों की सेवा में आसक्त शिष्यों को कल्पलता सम सेवा से जो काल व्यतीत हुआ है, आज उस सेवा का वह फल आपसे चाहता हूँ कि प्राणों के निकलते समय आपके नाम से सहित अक्षरों के पढ़ने में मेरा गला कुण्ठित न हो।
भक्ति