Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
भक्ति

हे भगवन्! मेरा बोलना आपकी जाप हो, मेरी चेष्टाएँ आपकी उपासना से सम्बद्ध मुद्राओं की रचना हो, चलना आदि प्रदक्षिणा लगाना हो, भोजन करना आपको विधिवत् दी गयी आहुतियाँ हो, भूमि में लेटना आपके लिए प्रणाम हों, इस प्रकार जितना भी मेरा विलास और चेष्टाएँ हैं, वे सब आत्मार्पण की विधि से की गई आपकी पूजा के पर्यायवाची हो जाएँ।

O Lord! May my speech be Your recitation, my gestures the forming of postures connected with Your worship, my walking a circumambulation of You, my eating oblations duly offered to You, my lying on the ground a prostration to You; thus may all my activities and gestures become synonymous with worship of You offered in the manner of self-surrender.

— आराध्य सूत्र · #4573

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हे जिनेन्द्र भगवान्! हे देवों के देव! बाल्यावस्था से आज तक आपके श्रीचरणों की सेवा में आसक्त शिष्यों को कल्पलता सम सेवा से जो काल व्यतीत हुआ है, आज उस सेवा का वह फल आपसे चाहता हूँ कि प्राणों के निकलते समय आपके नाम से सहित अक्षरों के पढ़ने में मेरा गला कुण्ठित न हो।
भक्ति