Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
भक्ति

जिसकी बुद्धि में जड़ता (सांसारिक भोग और संग्रह) का ही महत्त्व है, ऐसा मनुष्य कितना ही विद्वान् क्यों न हो, उसका पतन अवश्यम्भावी है, परन्तु जिसकी बुद्धि में जड़ता का महत्त्व नहीं है और भगवत्प्राप्ति ही जिसका उद्देश्य है, ऐसा मनुष्य विद्वान् न भी हो तो भी उसका उत्थान अवश्यम्भावी है।

He in whose mind inertness (worldly enjoyment and hoarding) alone holds importance—however learned such a person may be—his fall is certain; but he in whose mind inertness holds no importance and whose sole aim is attaining God—even if such a person is not learned—his rise is certain.

— आराध्य सूत्र · #4568

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हे जिनेन्द्र भगवान्! हे देवों के देव! बाल्यावस्था से आज तक आपके श्रीचरणों की सेवा में आसक्त शिष्यों को कल्पलता सम सेवा से जो काल व्यतीत हुआ है, आज उस सेवा का वह फल आपसे चाहता हूँ कि प्राणों के निकलते समय आपके नाम से सहित अक्षरों के पढ़ने में मेरा गला कुण्ठित न हो।
भक्ति