Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
भक्ति

जो व्यक्ति देव, गुरु और धर्म की उपासना के उद्देश्य से स्नान नहीं करता उसका स्नान मत्स्य, मगर आदि जलचर जीवों के स्नान की तरह व्यर्थ है।

The bath of one who does not bathe with the aim of worshipping the deity, the Guru, and dharma is as futile as the bathing of fish, crocodiles, and other aquatic creatures.

— आराध्य सूत्र · #4501

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हे जिनेन्द्र भगवान्! हे देवों के देव! बाल्यावस्था से आज तक आपके श्रीचरणों की सेवा में आसक्त शिष्यों को कल्पलता सम सेवा से जो काल व्यतीत हुआ है, आज उस सेवा का वह फल आपसे चाहता हूँ कि प्राणों के निकलते समय आपके नाम से सहित अक्षरों के पढ़ने में मेरा गला कुण्ठित न हो।
भक्ति