Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
भक्ति

जहाँ गुरु निन्दा चल रही हो वहाँ कान ढक लेना चाहिए या अन्यत्र चले जाना चाहिए क्योंकि जो दूसरों के द्वारा की गई गुरु अथवा स्वामी की निन्दा को सुनता है तथा सुनकर कुपित नहीं होता वह पुरुष कृतघ्न कहलाता है।

Where the guru is being reviled, one should cover one's ears or go elsewhere, for whoever hears others slander his guru or master and does not grow angry is called ungrateful.

— आराध्य सूत्र · #3487

इसी विषय के और सूत्र

सभी भक्ति →
हे जिनेन्द्र भगवान्! हे देवों के देव! बाल्यावस्था से आज तक आपके श्रीचरणों की सेवा में आसक्त शिष्यों को कल्पलता सम सेवा से जो काल व्यतीत हुआ है, आज उस सेवा का वह फल आपसे चाहता हूँ कि प्राणों के निकलते समय आपके नाम से सहित अक्षरों के पढ़ने में मेरा गला कुण्ठित न हो।
भक्ति