Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
भक्ति

मन में भगवान् का स्मरण बना रहे और मर्यादा का उल्लंघन न हो, यही सन्त का लक्षण है, संत प्रत्यक्ष शिक्षा न देते हों, तो भी उनकी सेवा करनी चाहिए।

To keep God in remembrance within the mind and never transgress propriety — this is the mark of a saint; even if a saint gives no direct teaching, one should still serve him.

— आराध्य सूत्र · #2160

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हे जिनेन्द्र भगवान्! हे देवों के देव! बाल्यावस्था से आज तक आपके श्रीचरणों की सेवा में आसक्त शिष्यों को कल्पलता सम सेवा से जो काल व्यतीत हुआ है, आज उस सेवा का वह फल आपसे चाहता हूँ कि प्राणों के निकलते समय आपके नाम से सहित अक्षरों के पढ़ने में मेरा गला कुण्ठित न हो।
भक्ति