Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
भक्ति

यदि इहलौकिक व पारलौकिक सुख-प्राप्ति में बाधा न पड़ती हो तो गुरु के वचनों का उल्लंघन नहीं करना चाहिए।

Unless it obstructs the attainment of worldly and otherworldly happiness, one should not violate the guru's words.

— आराध्य सूत्र · #2127

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हे जिनेन्द्र भगवान्! हे देवों के देव! बाल्यावस्था से आज तक आपके श्रीचरणों की सेवा में आसक्त शिष्यों को कल्पलता सम सेवा से जो काल व्यतीत हुआ है, आज उस सेवा का वह फल आपसे चाहता हूँ कि प्राणों के निकलते समय आपके नाम से सहित अक्षरों के पढ़ने में मेरा गला कुण्ठित न हो।
भक्ति