Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
भक्ति

गुरु के निकट होकर दूर होना श्रेष्ठ नहीं, दूर होकर निकट होना अतिश्रेष्ठ है।

To be near the guru yet distant is not good; to be distant yet near is best of all.

— आराध्य सूत्र · #2120

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हे जिनेन्द्र भगवान्! हे देवों के देव! बाल्यावस्था से आज तक आपके श्रीचरणों की सेवा में आसक्त शिष्यों को कल्पलता सम सेवा से जो काल व्यतीत हुआ है, आज उस सेवा का वह फल आपसे चाहता हूँ कि प्राणों के निकलते समय आपके नाम से सहित अक्षरों के पढ़ने में मेरा गला कुण्ठित न हो।
भक्ति