Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
भक्ति

जो शरीर की अनुकूलता-प्रतिकूलता में राजी नाराज होता है, वह हड्डी-मांस का भक्त है भगवान् का नहीं।

One who is pleased or displeased by the body's comfort or discomfort is a devotee of bone and flesh, not of God.

— आराध्य सूत्र · #1613

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हे जिनेन्द्र भगवान्! हे देवों के देव! बाल्यावस्था से आज तक आपके श्रीचरणों की सेवा में आसक्त शिष्यों को कल्पलता सम सेवा से जो काल व्यतीत हुआ है, आज उस सेवा का वह फल आपसे चाहता हूँ कि प्राणों के निकलते समय आपके नाम से सहित अक्षरों के पढ़ने में मेरा गला कुण्ठित न हो।
भक्ति