Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
भक्ति

अन्तःकरण यदि मलिन और अपवित्र बना रहे, तो परमात्मा की उपासना भी फलवती न होगी अतः ईश्वर की उपासना निष्पाप हृदय से करें।

If the inner conscience remains soiled and impure, even the worship of God will bear no fruit; therefore worship God with a sinless heart.

— आराध्य सूत्र · #982

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हे जिनेन्द्र भगवान्! हे देवों के देव! बाल्यावस्था से आज तक आपके श्रीचरणों की सेवा में आसक्त शिष्यों को कल्पलता सम सेवा से जो काल व्यतीत हुआ है, आज उस सेवा का वह फल आपसे चाहता हूँ कि प्राणों के निकलते समय आपके नाम से सहित अक्षरों के पढ़ने में मेरा गला कुण्ठित न हो।
भक्ति