Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
भक्ति

१. जो अश्रद्धालु है, २. पापात्मा है, ३. नास्तिक है, ४. संशयात्मा है और ५. केवल तर्क वितर्क में ही डूबा रहता है–ये पाँच प्रकार के मनुष्य तीर्थ के फल को प्राप्त नहीं करते हैं।

Five kinds of people do not gain the fruit of a pilgrimage: the faithless, the sinful, the atheist, the doubter, and the one forever lost in mere argument.

— आराध्य सूत्र · #972

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हे जिनेन्द्र भगवान्! हे देवों के देव! बाल्यावस्था से आज तक आपके श्रीचरणों की सेवा में आसक्त शिष्यों को कल्पलता सम सेवा से जो काल व्यतीत हुआ है, आज उस सेवा का वह फल आपसे चाहता हूँ कि प्राणों के निकलते समय आपके नाम से सहित अक्षरों के पढ़ने में मेरा गला कुण्ठित न हो।
भक्ति