Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
भक्ति

निष्काम भाव से की जाने वाली भक्ति की तुलना तीनों लोकों के किसी भी पदार्थ से नहीं की जा सकती है। मन में कामना रखकर भजन करने से केवल उसका फल मिलता है, पर निष्काम भक्ति से प्रभु पद की प्राप्ति होती है।

Devotion performed with a desireless spirit cannot be compared to any object in the three worlds. Worshipping with desire in the mind yields only its particular fruit, but through desireless devotion one attains the state of the Lord.

— आराध्य सूत्र · #943

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हे जिनेन्द्र भगवान्! हे देवों के देव! बाल्यावस्था से आज तक आपके श्रीचरणों की सेवा में आसक्त शिष्यों को कल्पलता सम सेवा से जो काल व्यतीत हुआ है, आज उस सेवा का वह फल आपसे चाहता हूँ कि प्राणों के निकलते समय आपके नाम से सहित अक्षरों के पढ़ने में मेरा गला कुण्ठित न हो।
भक्ति