Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
भक्ति

सम्यग्दृष्टि प्रभु के पास भिखारी नहीं भक्त बनकर जाता है।

One of right faith approaches the Lord not as a beggar but as a devotee.

— आराध्य सूत्र · #745

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हे जिनेन्द्र भगवान्! हे देवों के देव! बाल्यावस्था से आज तक आपके श्रीचरणों की सेवा में आसक्त शिष्यों को कल्पलता सम सेवा से जो काल व्यतीत हुआ है, आज उस सेवा का वह फल आपसे चाहता हूँ कि प्राणों के निकलते समय आपके नाम से सहित अक्षरों के पढ़ने में मेरा गला कुण्ठित न हो।
भक्ति