Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
भक्ति

जो देव-शास्त्र-गुरु का भक्त है और संसार-शरीर-भोगों से विरक्त है वह सम्यग्दृष्टि है।

One who is devoted to the deity, scripture, and teacher, and detached from the world, the body, and enjoyments, is of right faith.

— आराध्य सूत्र · #744

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हे जिनेन्द्र भगवान्! हे देवों के देव! बाल्यावस्था से आज तक आपके श्रीचरणों की सेवा में आसक्त शिष्यों को कल्पलता सम सेवा से जो काल व्यतीत हुआ है, आज उस सेवा का वह फल आपसे चाहता हूँ कि प्राणों के निकलते समय आपके नाम से सहित अक्षरों के पढ़ने में मेरा गला कुण्ठित न हो।
भक्ति