Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
भक्ति

श्रावक अभिषेक के समय प्रभु के और आहार दान के समय गुरु के अति निकट होता है, तब दो बांसों के घर्षण के समान भक्ति व चारित्र की ज्योति प्रकट होती है।

A layperson is very close to the Lord during the anointing rite and to the teacher during the offering of food; then, like the friction of two bamboos, the flame of devotion and conduct blazes forth.

— आराध्य सूत्र · #671

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हे जिनेन्द्र भगवान्! हे देवों के देव! बाल्यावस्था से आज तक आपके श्रीचरणों की सेवा में आसक्त शिष्यों को कल्पलता सम सेवा से जो काल व्यतीत हुआ है, आज उस सेवा का वह फल आपसे चाहता हूँ कि प्राणों के निकलते समय आपके नाम से सहित अक्षरों के पढ़ने में मेरा गला कुण्ठित न हो।
भक्ति