Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
भक्ति

सम्यग्दृष्टि जीव तीनों लोकों में कही भी हो पूज्य ही होता है, पर सम्यग्दर्शन के बिना साधु भी पद-पद पर निन्दनीय होता है।

A soul with right faith, wherever he may be in the three worlds, is worthy of worship; but without right faith, even an ascetic is blameworthy at every step.

— आराध्य सूत्र · #555

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हे जिनेन्द्र भगवान्! हे देवों के देव! बाल्यावस्था से आज तक आपके श्रीचरणों की सेवा में आसक्त शिष्यों को कल्पलता सम सेवा से जो काल व्यतीत हुआ है, आज उस सेवा का वह फल आपसे चाहता हूँ कि प्राणों के निकलते समय आपके नाम से सहित अक्षरों के पढ़ने में मेरा गला कुण्ठित न हो।
भक्ति