Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
भक्ति

भगवान् को मन्दिर में सुमन न चढ़ाओ तो चलेगा पर अपने सु-मन को भगवान् की भक्ति में नहीं लगाओगे तो नहीं चलेगा। अरे भाई! जब कुरूप, निर्धन, अपंग को राज कन्या वरमाला नहीं डालती तो फिर कुरूप मन अर्थात् अशुद्ध मन वाले को मुक्ति लक्ष्मी कैसे वरमाला डालेगी।

It will do if you do not offer flowers (suman) to the Lord in the temple, but it will not do if you do not engage your good mind (su-man) in devotion to the Lord. O brother! When a princess does not garland the ugly, the poor and the crippled, then how will the goddess of liberation garland one with an ugly, i.e. impure, mind?

— आराध्य सूत्र · #552

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हे जिनेन्द्र भगवान्! हे देवों के देव! बाल्यावस्था से आज तक आपके श्रीचरणों की सेवा में आसक्त शिष्यों को कल्पलता सम सेवा से जो काल व्यतीत हुआ है, आज उस सेवा का वह फल आपसे चाहता हूँ कि प्राणों के निकलते समय आपके नाम से सहित अक्षरों के पढ़ने में मेरा गला कुण्ठित न हो।
भक्ति