Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
भक्ति

‘‘पावन मेरे नयन भये तुम दरश तैं, पावन पाणी भये तुम चरणन परस तैं। पावन मन हो गयो तिहारे ध्यान तैं, पावन रसना मानी तुम गुण गानतै ॥’’

‘‘पावन मेरे नयन भये तुम दरश तैं, पावन पाणी भये तुम चरणन परस तैं। पावन मन हो गयो तिहारे ध्यान तैं, पावन रसना मानी तुम गुण गानतै ॥’’

Pure became my eyes by beholding You, pure became my hands by touching Your feet; pure became my mind by meditating on You, and pure my tongue felt by singing Your virtues.

— आराध्य सूत्र · #467

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हे जिनेन्द्र भगवान्! हे देवों के देव! बाल्यावस्था से आज तक आपके श्रीचरणों की सेवा में आसक्त शिष्यों को कल्पलता सम सेवा से जो काल व्यतीत हुआ है, आज उस सेवा का वह फल आपसे चाहता हूँ कि प्राणों के निकलते समय आपके नाम से सहित अक्षरों के पढ़ने में मेरा गला कुण्ठित न हो।
भक्ति