Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
भक्ति

जब एक गृहस्थ मुनि दीक्षा नहीं दे सकता है तो भगवान् को दीक्षा कैसे दे सकता है? सबसे बड़ी बात ऐसे लोग जो बिना मुनि से सूरि मंत्र की प्रतिष्ठित मूर्तियों की पूजा कर रहे हैं, उनमें से किसी का भी समाधिमरण नहीं देखा जा रहा है।

When a householder cannot give ascetic initiation to a monk, how can he give consecration to a Lord (idol)? The main point is that among those who worship idols consecrated with the Suri mantra without a monk, not one is seen to attain a peaceful samadhi-death.

— आराध्य सूत्र · #464

इसी विषय के और सूत्र

सभी भक्ति →
हे जिनेन्द्र भगवान्! हे देवों के देव! बाल्यावस्था से आज तक आपके श्रीचरणों की सेवा में आसक्त शिष्यों को कल्पलता सम सेवा से जो काल व्यतीत हुआ है, आज उस सेवा का वह फल आपसे चाहता हूँ कि प्राणों के निकलते समय आपके नाम से सहित अक्षरों के पढ़ने में मेरा गला कुण्ठित न हो।
भक्ति