Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
भक्ति

बिना श्रद्धा के किया हुआ हवन, दिया हुआ दान एवं तपा हुआ तप और जो कुछ भी किया हुआ शुभ कर्म है वह सब असत् कहलाता है वह न तो इस लोक में लाभदायक होता है न मरने के बाद परलोक में सुखदायी होता है।

A fire-offering made, charity given, austerity performed, and any auspicious deed done without faith — all this is called unreal; it is neither beneficial in this world nor happiness-giving in the next world after death.

— आराध्य सूत्र · #414

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हे जिनेन्द्र भगवान्! हे देवों के देव! बाल्यावस्था से आज तक आपके श्रीचरणों की सेवा में आसक्त शिष्यों को कल्पलता सम सेवा से जो काल व्यतीत हुआ है, आज उस सेवा का वह फल आपसे चाहता हूँ कि प्राणों के निकलते समय आपके नाम से सहित अक्षरों के पढ़ने में मेरा गला कुण्ठित न हो।
भक्ति