Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
संगति

घुड़साल का तोता- राजा ने दो तोते पलवाये एक घुड़साल में, एक रनवास में रखा, राजा एक दिन घुड़साल गया तो तोता बोला! रे बदमास पीछे हट जा, राजा को सुनकर क्रोध आया मेरा नमक खाकर मेरा अपमान करता है, इसको मरवा दो, राजा रनवास गया वहाँ का तोता राजा को देखकर दूर से ही मीठे नम्र स्वर में बोला, हे महाराज साहब स्वागत है, पधारिये, आसन ग्रहण कीजिये हे रानी, राजा साहब पधार रहें है, स्वागत करों, इसका व्यवहार देखकर राजा आश्चर्य में पड़ गया, एक माँ के दो बच्चे, एक भद्र दूसरा अभद्र ऐसा क्यों, मन्त्री जी ने जवाब दिया राजन्! ये सङ्गति व संस्कार का फल है, अपने आचरण से लोग आचरण सीखते है, गाँधी जी ने पहले अवगुण छोड़े फिर दूसरों से छुड़वाये।

'The parrots of the stable' — a king raised two parrots, keeping one in the stable and one in the harem. One day the king went to the stable and the parrot said, 'Get back, you scoundrel!' Angered that a bird eating his salt should insult him, the king ordered it killed. When he went to the harem, that parrot, seeing him from afar, said in a sweet, gentle voice, 'Welcome, Your Majesty, please be seated; O queen, the king is arriving, welcome him.' Amazed at the difference, the king asked how two birds of one mother could be so unlike, one refined and one coarse. The minister replied, 'O king, this is the fruit of company and upbringing; people learn conduct from the conduct they see — Gandhi first gave up his own faults, then had others give up theirs.'

— आराध्य सूत्र · #78

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संतों की संगति करके नर देह सार्थक कर लेना चाहिए। आसन से रोगों का नाश और प्राणायाम से पापों का नाश और योगी के मन के विकार प्रत्याहार से दूर हो जाते हैं। धारणा से धैर्य आता है तथा अद्भुत चैतन्य की प्राप्ति होती है समाधि से शुभाशुभ कार्यों को त्याग कर साधक मोक्ष को प्राप्त करता है।
संगति
जब कभी अपने हृदय को प्रफुल्लित करना चाहो, अपने निकटवर्तियों के शुभ गुणों को चित्त में लाओ, जैसे कि एक की स्फूर्ति, दूसरे की विनम्रता, तीसरे की उदारता, चौथे की ऐसी ही कोई अच्छाई अर्थात् गुणों की ओर दृष्टि होने से मन प्रसन्न रहता है।
संगति