Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
दान

गृहकर्मणापि निचितं, कर्मविमार्ष्टि खलु गृहविमुक्तानां। अतिथीनां प्रतिपूजा, रुधिरमलं धावते वारि।।

गृहत्यागी साधुओं को दिया हुआ दान घर के कार्यों से संचित पापों को उस तरह धो देता है, जैसे पानी खून को धो देता है।

Charity given to home-renouncing sadhus washes away the sins accumulated through household duties, just as water washes away blood.

— आराध्य सूत्र · #7

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परोपकार में सर्वदा संलग्न रहने वाला सज्जन व्यक्ति विनाश के अवसर पर भी विनाश करने वाले से भी शत्रु भाव नहीं रखता है जैसे चन्दन का वृक्ष काटने वाले कुल्हाड़े का भी मुख सुगन्धित कर देता है।
दान