Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
धन

विप्र का श्रीफल– एक ब्राह्मण को श्रीफल खरीदना था, दुकानदार ने उसका पाँच रुपया बताया, उसने पूँछा इससे कम में नहीं दोगे? दुकानदार ने आगे की दूकान में भेजा, वहाँ पर भी और कम में माँगने लगा, उसने कहा आप श्रीफल के बगीचे में चले जाये, वहाँ निःशुल्क मिल जायेगा, वह श्रीफल से लटक गया, ऊँट वाले से कहा! भैया हम तुम्हें पचास रूपये देगें हमें उतार लो, ऊँट खड़ा किया, उसको पकड़ा इतने में ऊँट आगे बढ़ गया। इसी तरह घोड़ा वाला आया, तो दोनों ने कहा हम दोनों पचास–पचास रुपये देंगे, हम लोगों को उतार लो, और वह भी लटक गया, अब दोनों ने विप्र से कहा, तुम अच्छे से पकड़े रहना, हम दोनों पाँच–पाँच सौ रूपये देंगे, अब विप्र नोटों की खुशी में भूल गया, और हाथ छूट गये तीनों गिरे और, काल के गाल में समा गये।

The Brahmin's coconut: A Brahmin wanted to buy a coconut; the shopkeeper quoted five rupees. He asked for a lower price and was sent to the next shop, then bargained still lower, until he was told to go to the coconut orchard and get one free. There he hung from a coconut. A camel-driver passed and he offered fifty rupees to be let down; grabbing the camel, it moved on. A horseman came and both offered fifty rupees each, and he too ended up hanging. Now the two told the Brahmin to hold on tight and they would each give five hundred rupees; overjoyed at the money the Brahmin let go—all three fell and were swallowed into the jaws of death.

— आराध्य सूत्र · #65

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लक्ष्मी हिंडोले की तरह चंचल है। विषयों से उत्पन्न हुआ सुख अंततः दुःखप्रद है। देह विपत्ति का घर है। अत्यधिक धन मृत्यु का प्रचुर साधन है। संसार अत्यधिक शोकपूर्ण है। स्त्रियाँ अनर्थ की जड़ हैं। फिर भी लोग इस घोर संसार में ही रत रहते हैं। आत्मा में रत नहीं होते यह आश्चर्य है।
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