Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
धन

लोभी भाई ने भाई की आँखें फोड़ी– दो सगे भाई थे, लेकिन गरीब थे, जङ्गल से लकड़ी लाते और बेच कर उदर पूर्ति करते थे, बड़ा भाई ईमानदार था, सरल था उसकी लकड़ी अच्छे दामों में जल्दी बिक जाती थी, लेकिन छोटे भाई को इससे बडा दुःख होता था, एक दिन उसने सोचा कि बड़े भाई को मार डाला जाय, तो फिर मेरी लकड़ी अच्छे दामों में बिकेगी। दूसरे दिन जङ्गल गये, भीषण गर्मी थी छोटे भाई ने कहा भैया पहले आपकी तूमड़ी का पानी खर्च कर लेते हैं, बाद में हम पिलाते रहेंगे। भैया तो भोला था, वह कुछ समझा नहीं और वैसा ही किया लकड़ी इकट्ठी करने के बाद भाई को प्यास लगी, पानी माँगा तो उसने कहा कि हम पहले आपकी एक आँख फोड़ेंगे तब पानी देंगे, बड़े भाई ने तो सोचा भी नहीं था कि ये ऐसा पाप भी कर सकता है, वह आँखें फोड़ कर चला गया, जिससे बड़े भाई को दिखना बन्द हो गया, अन्धा भाई जङ्गल में भटकते–भटकते मर गया।

A greedy brother gouged out his brother's eyes: Two brothers, though poor, gathered and sold firewood to feed themselves. The elder was honest and simple, and his wood sold quickly at good prices, which grieved the younger. One day he thought that if he killed his elder brother, his own wood would sell well. Next day in the forest, in scorching heat, the younger said, 'Brother, let us first use up the water in your gourd.' The simple elder agreed. After gathering wood the elder grew thirsty and asked for water; the younger said, 'First I will put out one of your eyes, then I will give water.' The elder, who never imagined such a sin, had his eyes gouged out and was left blind. Wandering the forest, the blind brother died.

— आराध्य सूत्र · #64

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लक्ष्मी हिंडोले की तरह चंचल है। विषयों से उत्पन्न हुआ सुख अंततः दुःखप्रद है। देह विपत्ति का घर है। अत्यधिक धन मृत्यु का प्रचुर साधन है। संसार अत्यधिक शोकपूर्ण है। स्त्रियाँ अनर्थ की जड़ हैं। फिर भी लोग इस घोर संसार में ही रत रहते हैं। आत्मा में रत नहीं होते यह आश्चर्य है।
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