Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
Humility

विनम्रता

456 सूत्र · पृष्ठ 7 / 7

गुरु के सानिध्य में थूकना, टिक के बैठना, जम्हाई लेना, अङ्गड़ाई लेना, झूठ बोलना, असभ्य हँसना, पैर फैलाना, उपदेशक बनना, ताल ठोकना, ताली बजाना, कटाक्ष करना, अङ्ग संस्कार आदि नहीं करना चाहिये।
विनम्रता
पर से यदि होता कभी राई सा उपकार। वह कृतज्ञ नर को दिखे ताड़ तुल्य हर बार।।
विनम्रता
कोमलता- कुण्डलपुर में आचार्यश्री के पास आर्यिकायें आयीं, नमोऽस्तु करके बैठ गयीं, वहाँ हल्की सी धूप थी आचार्यश्री वहाँ से उठे, ताकि आर्यिकायें छाया में बैठ जायेंगी।
विनम्रता
आशीर्वाद के समय हाथ का पञ्जा कुछ झुका रहता है, अर्थात् 'मिल कर रहो और नम्र बनो' यह शिक्षा देता है।
विनम्रता
नैनागिर जी में सब साधुओं की चरणछूकर वन्दना करते थे तो सब साधुओं ने कहा वहीं से कर लिया करो, वर्णीजी ने कहा अविनय होती है।
विनम्रता
आठ विशेषताएं- निरभिमानी, अत्यन्त सरल, आडम्बर शून्य, बातचीत में अपनत्व का अनुभव कराने वाले, उनका जीवन ज्ञान और कर्म की दृष्टि से विकास शील था, सदैव नई बात जानने के इच्छुक, हर धर्म के सन्त, वाणी सीधी-साधी हृदयग्राही होती थी।
विनम्रता