Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
Discernment

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2 सूत्र

'पर्ययमूढ़ा'- एक धनाढ्य व्यक्ति ने सोने के गणेश और चूहा बनवाये थे, दैव योग से उन्हें बेंचने कि नौबत आ गई, दुकानदारों ने दोनों को एक ही भाव में माँगा, क्योंकि दुकानदारों की दृष्टि में वह सोना अर्थात् द्रव्य था और बेंचने वाले की दृष्टि में वह मूर्ति अर्थात् पर्याय थी, इसलिए वह दुःखी हो रहा था।
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'पर्ययविजुदं'- एक व्यक्ति को आभूषण बनवाने के लिए सोना खरीदना था लेकिन वह सोना किसी भी पर्याय मे नहीं चाहता था, पर विना पर्याय के सोना प्राप्त नहीं होता है, द्रव्य-गुण-पर्याय तीनों को ध्यान में रखने से ही तत्त्व का सही निर्णय होता है।
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