Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
क्षमा

प्रायश्चित से पिछले पाप के प्रति विरक्ति उत्पन्न होती है और आगे के लिए सावधानी होती है।

Through atonement, aversion arises toward past sin and vigilance for the future.

— आराध्य सूत्र · #289

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कोई भी प्राणी तुम्हारे द्वारा तिरस्कार के योग्य नहीं है, ये तो सब स्वतन्त्र पदार्थ हैं, इनसे तेरा सम्बन्ध क्या है? अपने क्रोध–मान–माया–लोभ का तिरस्कार तेजी से करो, इन्हीं कषायों ने तुझे भटका रखा है और दुःखी कर रखा है।
क्षमा
यदि तुम कल्याण व उन्नति चाहते हो तो दूसरों के कल्याण व उन्नति में ईर्ष्या मत करो प्रत्युत उनके कल्याण व उन्नति की भावना रखो क्योंकि मात्सर्य भाव स्वयं अकल्याण है, इस अशुभ प्रयोग के रहते उन्नति हो ही नहीं सकती है।
क्षमा