Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
क्षमा

कोई भी प्राणी तुम्हारे द्वारा तिरस्कार के योग्य नहीं है, ये तो सब स्वतन्त्र पदार्थ हैं, इनसे तेरा सम्बन्ध क्या है? अपने क्रोध–मान–माया–लोभ का तिरस्कार तेजी से करो, इन्हीं कषायों ने तुझे भटका रखा है और दुःखी कर रखा है।

No living being is fit to be scorned by you; they are all independent substances — what relation have you with them? Scorn instead, and swiftly, your own anger, pride, deceit and greed; it is these passions that have kept you wandering and made you miserable.

— आराध्य सूत्र · #439

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यदि तुम कल्याण व उन्नति चाहते हो तो दूसरों के कल्याण व उन्नति में ईर्ष्या मत करो प्रत्युत उनके कल्याण व उन्नति की भावना रखो क्योंकि मात्सर्य भाव स्वयं अकल्याण है, इस अशुभ प्रयोग के रहते उन्नति हो ही नहीं सकती है।
क्षमा