Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
ब्रह्मचर्य

विवेकी शिष्य को जोर-जोर से पढ़ना, गाते हुए पढ़ना, हास-परिहास, स्त्रियों के निवासस्थल में रहना, उनके शरीर को देखना, साथ-साथ वार्तालाप करना, उनके शरीर का स्पर्श करना, उनके पुत्रों को निरन्तर खिलाना, उनके आगे पति की अत्यधिक प्रशंसा करना, ज्योतिष, मन्त्र, निमित्त ज्ञान, औषध, सञ्चित धन और शरीर का पोषण करना इत्यादिक छोड़ देना चाहिए।

A discerning disciple should give up reading aloud loudly, reading in song, jest and mockery, dwelling where women live, gazing at their bodies, chatting with them, touching their bodies, constantly feeding their sons, excessively praising a husband before them, astrology, mantras, omen-lore, medicine, hoarded wealth and pampering the body.

— आराध्य सूत्र · #38

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जिसने वैराग्य रूपी तलवार के द्वारा इन्द्रियरूपी चोरों को नष्ट कर दिया उसको स्वर्ग मोक्ष अवश्य प्राप्त होता है। वैराग्य के बिना शरीर को दण्डित करना व्यर्थ है। जब चित्रादि में निर्मित स्त्री मन में क्षोभ उत्पन्न करती है तब स्त्री के संसर्ग और वार्तालाप में मन एकाग्र कैसे रह सकता है?
ब्रह्मचर्य