Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
संगति

साधूनां सङ्गतिस्सत्यं, फलत्युच्चैस्सदा सुखं। भव्यानां कल्पवल्लीव, परमानन्ददायिनी।।

साधुओं की सङ्गति ही वास्तविक सङ्गति है, वह हमेशा श्रेष्ठ सुखदायी होती है, भव्यों के लिए कल्पवृक्ष के समान परमानन्द देने वाली होती है।

The company of holy ones is the true company; it ever yields the highest happiness and, like a wish-fulfilling creeper, bestows supreme bliss on the worthy.

— आराध्य सूत्र

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संतों की संगति करके नर देह सार्थक कर लेना चाहिए। आसन से रोगों का नाश और प्राणायाम से पापों का नाश और योगी के मन के विकार प्रत्याहार से दूर हो जाते हैं। धारणा से धैर्य आता है तथा अद्भुत चैतन्य की प्राप्ति होती है समाधि से शुभाशुभ कार्यों को त्याग कर साधक मोक्ष को प्राप्त करता है।
संगति
जब कभी अपने हृदय को प्रफुल्लित करना चाहो, अपने निकटवर्तियों के शुभ गुणों को चित्त में लाओ, जैसे कि एक की स्फूर्ति, दूसरे की विनम्रता, तीसरे की उदारता, चौथे की ऐसी ही कोई अच्छाई अर्थात् गुणों की ओर दृष्टि होने से मन प्रसन्न रहता है।
संगति