पर निन्दा समं पापं, न भूतो न भविष्यति। आत्म निन्दा समं पुण्यं, न भूतो न भविष्यति।।
पर की निन्दा के समान पाप न भूत में हुआ है न भविष्य में होगा और अपनी निन्दा के समान पुण्य न भूत में हुआ है न भविष्य में होगा।
No sin like slandering others has been in the past nor will be in the future, and no merit like censuring oneself has been in the past nor will be in the future.
— आराध्य सूत्र · #26
–