Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
क्षमा

अग्नि में चार कषाय- क्रोध के कारण जला देती है, मान के कारण ऊपर जाती है, माया के कारण राख में छिपी रहती है, लोभ के कारण ईधन से तृप्त नहीं होती है।

Four passions in fire: through anger it burns; through pride it rises upward; through deceit it stays hidden in the ash; through greed it is never satisfied by fuel.

— आराध्य सूत्र · #23

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कोई भी प्राणी तुम्हारे द्वारा तिरस्कार के योग्य नहीं है, ये तो सब स्वतन्त्र पदार्थ हैं, इनसे तेरा सम्बन्ध क्या है? अपने क्रोध–मान–माया–लोभ का तिरस्कार तेजी से करो, इन्हीं कषायों ने तुझे भटका रखा है और दुःखी कर रखा है।
क्षमा