Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
मन

भाव समवाय- मन की महत्त्वाकाङ्क्षा पर रोक लगाना, कर्म-नोकर्म मिलने पर राग-द्वेष नहीं होना भाव समवाय प्रत्यय है, जब तक भावों में निर्मलता नहीं होगी तब तक द्रव्य, क्षेत्र, काल और भव रूप चार प्रत्यय मिलने पर भी कार्य की सिद्धि नहीं होगी।

Emotional convergence: to check the mind's ambition, and to feel no attachment or aversion when karma and quasi-karma are present, is the causal factor of emotion; until the emotions become pure, even when the four factors of substance, region, time and birth are present, the task will not be accomplished.

— आराध्य सूत्र · #35

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आपके पास सिर्फ तीन ही चीजें हैं तन-मन और धन। अतः आप तन को अपने बीबी-बच्चों को दे देना, धन कुटुंब-कबीले को देना तो चल भी सकता है किन्तु 'मन' किसी को मत देना, मन तो मात्र परमात्मा के स्मरण में लगाना चाहिए।
मन