Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
क्षमा

धवल सेठ ने श्रीपाल जी को समुद्र में गिरा दिया, उनकी पत्नी रयणमञ्जूषा से बलात्कार करना चाहा, श्रीपाल जी को भाण्ड सिद्ध करने की भी कोशिश की, फाँसी लगने की नौवत आ गयी, इसके बाद भी राजा से कहा कि ये हमारे धर्म पिता हैं, इन्हें फाँसी पर न चढ़ाया जाये और धर्मात्मा श्रीपाल जी ने पाँच सौ लोगों के साथ धवलसेठ का निमन्त्रण किया, अपने हाथ से पड्डा झुलाते हुए खीर-पुड़ी का भोजन कराने लगे, सेठ को अत्यधिक पश्चात्ताप व आत्मग्लानी हुयी और हृदयाघात से मरण को प्राप्त हो गया था।

Dhaval Seth threw Shripal into the sea, sought to violate his wife Ratnamanjusha, and even tried to prove Shripal a thief, until it came to the gallows; yet even then Shripal told the king, 'He is my dharma-father, let him not be hanged,' and the pious Shripal invited Dhaval Seth with five hundred people and, fanning him with his own hand, served him a feast of kheer and puri. The Seth felt such deep remorse and self-reproach that he died of a heart attack.

— आराध्य सूत्र · #8

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कोई भी प्राणी तुम्हारे द्वारा तिरस्कार के योग्य नहीं है, ये तो सब स्वतन्त्र पदार्थ हैं, इनसे तेरा सम्बन्ध क्या है? अपने क्रोध–मान–माया–लोभ का तिरस्कार तेजी से करो, इन्हीं कषायों ने तुझे भटका रखा है और दुःखी कर रखा है।
क्षमा