Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
क्षमा

राजा मधु की क्षमा- शत्रुघ्न को मथुरा का राज लेने के लिये राजामधु से घमासान युद्ध करना पड़ा, जब मधु का शरीर वाणों से जर-जर हो गया, तो हाथी पर बैठे-बैठे सब परिग्रह का त्याग कर मुनि बन गए, शत्रुघ्न को मालूम हुआ तो क्षमा माँगी, नमस्कार किया, राजा ने कृतज्ञता ज्ञापित की कि आपने बहुत उपकार किया कल्याण का अवसर दिया।

King Madhu's forgiveness: Shatrughna had to fight a fierce war with King Madhu to take the kingdom of Mathura; when Madhu's body was riddled with arrows, seated on his elephant he renounced all possessions and became a muni. Learning this, Shatrughna begged pardon and bowed; the king expressed gratitude, saying, 'You have done me a great favour and given me the occasion for my welfare.'

— आराध्य सूत्र · #3

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कोई भी प्राणी तुम्हारे द्वारा तिरस्कार के योग्य नहीं है, ये तो सब स्वतन्त्र पदार्थ हैं, इनसे तेरा सम्बन्ध क्या है? अपने क्रोध–मान–माया–लोभ का तिरस्कार तेजी से करो, इन्हीं कषायों ने तुझे भटका रखा है और दुःखी कर रखा है।
क्षमा