Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
क्षमा

अन्धे के हाथ में लेम्प- किसी ने अन्धे को धक्का मार दिया, उसका घड़ा फूट गया, फिर भी उसी को डाँटते हैं, क्यों अन्धे हो दिखता नहीं ? अन्धे ने जबाब दिया जी नहीं दिखता, दूसरे दिन अन्धा हाथ में लेम्प लेकर पानी भरने जा रहा था, वही व्यक्ति उसको फिर मिला, पूछा ! आप कल कह रहे थे, हम अन्धे हैं फिर आपने लेम्प क्यों ले रखा है ? उसने जबाब दिया आप जैसे आँखों वालों को राह दिखाने के लिये, सज्जन पुरूषों का कितना भी नुकसान हो जाये वे क्रोधित नहीं होते हैं।

A lamp in a blind man's hand: someone shoved a blind man and his pot broke, yet he scolded the blind man — 'Are you blind, can't you see?' The blind man replied, 'No, sir, I cannot see.' The next day the blind man was going to fetch water with a lamp in his hand; the same man met him and asked, 'Yesterday you said you were blind — then why do you carry a lamp?' He answered, 'To show the way to sighted people like you.' However much loss they suffer, good men do not grow angry.

— आराध्य सूत्र · #1

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कोई भी प्राणी तुम्हारे द्वारा तिरस्कार के योग्य नहीं है, ये तो सब स्वतन्त्र पदार्थ हैं, इनसे तेरा सम्बन्ध क्या है? अपने क्रोध–मान–माया–लोभ का तिरस्कार तेजी से करो, इन्हीं कषायों ने तुझे भटका रखा है और दुःखी कर रखा है।
क्षमा