Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
ब्रह्मचर्य

पत्नि ने पति को पिताजी कहा- पण्डित ठाकुरदास जी की पत्नि भोगों से उदासीन हो गयी, बार-बार कहती थी, कि अब ब्रह्मचर्य व्रत ले लेवें, लेकिन पण्डित जी टाल देते थे, एक दिन पण्डित जी की गोद में बैठकर बोलीं 'पिताजी अब मुझे क्षमा कर दो, मैं व्रत पालना चाहती हूँ', पण्डित जी ने आँखों में आँसु भरकर कहा बेटी आज से अपन अखण्ड ब्रह्मचर्य व्रत का पालन करेंगे, तुमने मुझे वह शिक्षा दे दी जो अनेक शास्त्र भी नहीं दे सके।

The wife who called her husband 'father': Pandit Thakurdas's wife grew indifferent to pleasures and repeatedly urged that they take the vow of celibacy, but the pandit put it off. One day, sitting in his lap, she said, 'Father, now forgive me; I wish to keep the vow.' With tears in his eyes the pandit said, 'Daughter, from today we shall keep the unbroken vow of celibacy; you have given me the teaching that many scriptures could not.'

— आराध्य सूत्र · #29

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जिसने वैराग्य रूपी तलवार के द्वारा इन्द्रियरूपी चोरों को नष्ट कर दिया उसको स्वर्ग मोक्ष अवश्य प्राप्त होता है। वैराग्य के बिना शरीर को दण्डित करना व्यर्थ है। जब चित्रादि में निर्मित स्त्री मन में क्षोभ उत्पन्न करती है तब स्त्री के संसर्ग और वार्तालाप में मन एकाग्र कैसे रह सकता है?
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