Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
ब्रह्मचर्य

बनारसी साड़ी- गणेश प्रसाद वर्णी जी के विद्यागुरू पण्डित ठाकुरदासजी की सर्विस बनारस में लग गयी थी, वे छः माह बाद जब घर आये, तो पत्नि के लिए पाँच रुपये की बनारसी साड़ी लेकर आये, जब पत्नि को दिखाई तो पण्डित जी ने सोचा कि पत्नि प्रसन्न होगी, लेकिन पत्नि उदासीन होकर कहती है कि जब मैं ये साधारण साड़ियाँ पहनती हूँ तब भी आप बनारस से यहाँ दौड़े आये, अब इस बनारसी साड़ी को पहनकर मैं किसको रिझाऊँ ? पण्डित जी चुप हो गये, उनकी पत्नी ने पाँच रुपये की साड़ी साढ़े चार रुपये में पड़ोसी को बेच दी, लेकिन उन्होंने वह भड़कीली साड़ी नहीं पहनी।

The Banarasi saree: Pandit Thakurdas, the learned teacher of Ganesh Prasad Varni, took service in Banaras; when he came home after six months he brought his wife a five-rupee Banarasi saree, thinking she would be pleased. But indifferently she said, 'Even when I wear these ordinary sarees you hurry home from Banaras; now, wearing this Banarasi saree, whom shall I charm?' The pandit fell silent; his wife sold the five-rupee saree to a neighbour for four and a half rupees and never wore that gaudy saree.

— आराध्य सूत्र · #28

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जिसने वैराग्य रूपी तलवार के द्वारा इन्द्रियरूपी चोरों को नष्ट कर दिया उसको स्वर्ग मोक्ष अवश्य प्राप्त होता है। वैराग्य के बिना शरीर को दण्डित करना व्यर्थ है। जब चित्रादि में निर्मित स्त्री मन में क्षोभ उत्पन्न करती है तब स्त्री के संसर्ग और वार्तालाप में मन एकाग्र कैसे रह सकता है?
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