Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
ब्रह्मचर्य

वह मार्ग जरूर मनोरम है, पर कण्टक कीरण दुर्गम है। गुजरे जितने जन इस मग से, परिहास हुआ सबका सम है। मत जा मन उस ओर अरे, वह स्वप्न मृगाम्बु तथा भ्रम है।।

That path is indeed alluring, but strewn with thorns and hard to tread. Of all who passed this way, all alike were mocked. O mind, go not that way - it is a dream, a mirage, an illusion.

— आराध्य सूत्र · #46

इसी विषय के और सूत्र

सभी ब्रह्मचर्य →
जिसने वैराग्य रूपी तलवार के द्वारा इन्द्रियरूपी चोरों को नष्ट कर दिया उसको स्वर्ग मोक्ष अवश्य प्राप्त होता है। वैराग्य के बिना शरीर को दण्डित करना व्यर्थ है। जब चित्रादि में निर्मित स्त्री मन में क्षोभ उत्पन्न करती है तब स्त्री के संसर्ग और वार्तालाप में मन एकाग्र कैसे रह सकता है?
ब्रह्मचर्य