Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
ब्रह्मचर्य

अपिहितमहाघोरद्वारं न किं नरकापदा, मुपकृतवतो भूयः किं तेन न चेदमपाकरोत्। कुशलविलयज्वाला जाले कलत्र कलेवरे, कथमिव भवानत्र प्रीतः पृथग्जनदुर्लभे।।

स्त्री नरक की घोर आपत्तियों का खुला दरवाजा है, तूने कितनी बार उनका उपकार किया है पर उन्होंने अपकार ही किया है, पुण्य को जलाने के लिए अग्नि स्वरूप स्त्री के शरीर में आप क्यों राग करते हो, यह स्त्री शरीर तो मूर्खों के लिए दुर्लभ लगता है।

Woman is the open door to the terrible calamities of hell; how many times have you done her good, yet she has only done you harm. Why do you feel attachment for a woman's body, which is like a fire to burn up your merit? This woman's body seems precious only to fools.

— आराध्य सूत्र · #42

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जिसने वैराग्य रूपी तलवार के द्वारा इन्द्रियरूपी चोरों को नष्ट कर दिया उसको स्वर्ग मोक्ष अवश्य प्राप्त होता है। वैराग्य के बिना शरीर को दण्डित करना व्यर्थ है। जब चित्रादि में निर्मित स्त्री मन में क्षोभ उत्पन्न करती है तब स्त्री के संसर्ग और वार्तालाप में मन एकाग्र कैसे रह सकता है?
ब्रह्मचर्य