Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
ब्रह्मचर्य

मैथुनाचरणे मूढः प्रियन्ते जन्तुकोट्यः। योनिरन्ध्र समुत्पन्नाः लिङ्ग सङ्घट्ट पीडिताः।।

हे मूर्ख! मैथुन के सेवन से योनी में उत्पन्न होने वाले करोड़ों जीव (पञ्चेन्द्रिय लब्धि अपर्याप्तक मनुष्य) लिंग के घर्षण से मृत्यु को प्राप्त हो जाते हैं। माह में चार पर्वों में भी ब्रह्मचर्य पालने से करोड़ों जीवों को अभयदान मिल जाता है।

O fool! In the act of intercourse crores of beings born in the womb (five-sensed, labdhi-aparyaptaka humans) are killed by the friction of the organ. Yet by keeping celibacy even on the four sacred days of each month, crores of beings are granted the gift of fearlessness.

— आराध्य सूत्र · #41

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जिसने वैराग्य रूपी तलवार के द्वारा इन्द्रियरूपी चोरों को नष्ट कर दिया उसको स्वर्ग मोक्ष अवश्य प्राप्त होता है। वैराग्य के बिना शरीर को दण्डित करना व्यर्थ है। जब चित्रादि में निर्मित स्त्री मन में क्षोभ उत्पन्न करती है तब स्त्री के संसर्ग और वार्तालाप में मन एकाग्र कैसे रह सकता है?
ब्रह्मचर्य