Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
ब्रह्मचर्य

आद्यं शरीरसंस्कारो, द्वितीयं वृष्यसेवनं। तौर्यत्रिकं तृतीयं स्यात्, संसर्गस्तुर्यमिष्यते।। योषिद्विषयसङ्कल्पं, पञ्चमं परिकीर्तितं। दङ्गवीक्षणं षष्ठं, संस्कारः सप्तमं मतं।। पूर्वानुभोग सम्भोगं, स्मरणं स्यात् तदष्टमं। नवमी भाविनी चिन्ता, दशमं वस्तिमोक्षणं।।

ब्रह्मचर्य के दोष- 1.शरीर संस्कार, 2.गरिष्ठ भोजन, 3.गाना-बजाना-नाचना, 4.स्त्री सङ्गति, 5.स्त्री के विषय में सङ्कल्प करना, 6.अङ्गोपांग निरीक्षण, 7.स्त्री का सम्मान करना, 8.पूर्व के भोगों का स्मरण करना, 9.भविष्य में भोगों की चिन्ता होना, 10.वीर्यक्षरण होना।

The flaws (that break) celibacy: (1) adorning the body, (2) rich aphrodisiac food, (3) singing, playing music and dancing, (4) the company of women, (5) forming intentions about women, (6) gazing at their limbs, (7) honouring women, (8) recollecting past enjoyments, (9) anxiety about future enjoyments, (10) discharge of semen.

— आराध्य सूत्र · #40

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जिसने वैराग्य रूपी तलवार के द्वारा इन्द्रियरूपी चोरों को नष्ट कर दिया उसको स्वर्ग मोक्ष अवश्य प्राप्त होता है। वैराग्य के बिना शरीर को दण्डित करना व्यर्थ है। जब चित्रादि में निर्मित स्त्री मन में क्षोभ उत्पन्न करती है तब स्त्री के संसर्ग और वार्तालाप में मन एकाग्र कैसे रह सकता है?
ब्रह्मचर्य