Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
ब्रह्मचर्य

आयु तेजो बलं वीर्यं, प्रज्ञा श्रीश्च महद्यशः। पुण्यं च प्रीतिमत्वं च, हन्यतेऽब्रह्मचर्यतः।।

कुशील से आयु, तेज, बल, वीर्य, बुद्धि, लक्ष्मी, विशाल यश, पुण्य एवं प्रीति सब कुछ नष्ट हो जाता है।

Through unchastity, lifespan, lustre, strength, virility, intellect, fortune, vast fame, merit and affection - all are destroyed.

— आराध्य सूत्र · #38

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जिसने वैराग्य रूपी तलवार के द्वारा इन्द्रियरूपी चोरों को नष्ट कर दिया उसको स्वर्ग मोक्ष अवश्य प्राप्त होता है। वैराग्य के बिना शरीर को दण्डित करना व्यर्थ है। जब चित्रादि में निर्मित स्त्री मन में क्षोभ उत्पन्न करती है तब स्त्री के संसर्ग और वार्तालाप में मन एकाग्र कैसे रह सकता है?
ब्रह्मचर्य