पाकं त्यागं विवेकं च, वैभवं मानितामपि। कामार्त्तः खलु मुञ्चन्ति, किमन्यैः स्वञ्च जीवितं।।
कामी मनुष्य भोजन, संयम, विवेक, वैभव, स्वाभिमान यहाँ तक कि अपना जीवन भी नष्ट कर देता है।
The lustful man destroys food, self-restraint, discernment, prosperity, self-respect - and even his own life.
— आराध्य सूत्र · #37
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