विषयासक्त चित्तानां, गुणः को वा न नश्यति। न मानुष्यं न वैदुष्यं, नाभिजात्यं च सत्यवाक्।।
विषयासक्त मनुष्य के मनुष्यता, विद्वत्ता, कुलीनता एवं सत्यवचन आदि कौन से गुण नष्ट नहीं हो जाते हैं?
For a man addicted to sense-objects, which virtue is not destroyed - humanity, learning, noble birth, or truthful speech?
— आराध्य सूत्र · #36
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