Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
ब्रह्मचर्य

तिल तैलमैवमिष्टम्, येन न दृष्टं घृतं क्वापि। अविदित परमानन्दो, वदति स एव विषय रमणीयः।।

जिन्होंने कभी घी नहीं देखा, वे ही तिली के तैल को मीठा कहते हैं, उसी प्रकार जिन्हें परमानन्द प्राप्त नहीं हुआ वे ही विषयों को मनोहर कहते हैं।

Only those who have never seen ghee call sesame oil sweet; likewise, only those who have not attained supreme bliss call sense-objects delightful.

— आराध्य सूत्र · #35

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जिसने वैराग्य रूपी तलवार के द्वारा इन्द्रियरूपी चोरों को नष्ट कर दिया उसको स्वर्ग मोक्ष अवश्य प्राप्त होता है। वैराग्य के बिना शरीर को दण्डित करना व्यर्थ है। जब चित्रादि में निर्मित स्त्री मन में क्षोभ उत्पन्न करती है तब स्त्री के संसर्ग और वार्तालाप में मन एकाग्र कैसे रह सकता है?
ब्रह्मचर्य