Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
ब्रह्मचर्य

माता स्वसा दुहित्रा वा, न विविक्तासनो भवेत्। बलवान् इन्द्रियग्रामो, विद्वान् समपकर्षति।।

माता, बहिन और पुत्री के साथ भी एकान्त में नहीं बैठना चाहिये क्योंकि इन्द्रियाँ विद्वान् को भी पतित कर देती हैं।

One should not sit alone even with mother, sister or daughter, for the powerful troop of the senses drags down even the learned.

— आराध्य सूत्र · #34

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जिसने वैराग्य रूपी तलवार के द्वारा इन्द्रियरूपी चोरों को नष्ट कर दिया उसको स्वर्ग मोक्ष अवश्य प्राप्त होता है। वैराग्य के बिना शरीर को दण्डित करना व्यर्थ है। जब चित्रादि में निर्मित स्त्री मन में क्षोभ उत्पन्न करती है तब स्त्री के संसर्ग और वार्तालाप में मन एकाग्र कैसे रह सकता है?
ब्रह्मचर्य